स्वास्थ्य

पुरुषों की कमजोरी दूर करने वाली ये है दुनिया की सबसे महंगी पहाड़ी जड़ी बूटी, कीमत 60 लाख प्रति किलो

न्यूज़ शेयर करना न भूले |
  • 2
  •  
  •  
हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में एक नायाब जड़ी मिलती है ‘यारशागुंबा’ जिसका उपयोग भारत में तो नहीं होता लेकिन चीन में इसका इस्तेमाल प्राकृतिक स्टीरॉयड की तरह किया जाता है।शक्ति बढ़ाने में इसकी करामाती क्षमता के कारण चीन में ये जड़ी खिलाड़ियों खासकर एथलीटों को दी जाती है। इस जड़ी की यह उपयोगिता देखकर पिथौरागढ़ और धारचूला के इलाकों में बड़े पैमाने पर स्थानीय लोग इसका दोहन और तस्करी कर रहे हैं क्योंकि चीन में इसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है।यहां तक कि इसके संग्रह और व्यापार में शामिल लोगों में इसके लिए खूनी संघर्ष होने की घटनाएं देखने में आई हैं और कुमाऊं में हत्या के दो मामले भी दर्ज हो चुके हैं।जब इसके अवैध कारोबार की खबर सरकार और वैज्ञानिकों के कानों में पड़ी तो सब जागे और इसकी खोज में निकल पड़े बर्फ से लदी चोटियों की तरफ।

कीड़ा-जड़ी

kida jadi

सामान्य तौर पर समझें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है जो एक खास कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसपर पनपता है।इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम है कॉर्डिसेप्स साइनेसिस और जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर ये उगता है उसका नाम है हैपिलस फैब्रिकस।स्थानीय लोग इसे कीड़ा-जड़ी कहते हैं क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी है और चीन-तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है।देहरादून स्थित भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, एफआरआई का एक दल हाल ही में इसका अध्ययन करके लौटा है। एफआरआई में फॉरेस्ट पैथोलजी विभाग के प्रमुख डॉ निर्मल सुधीर हर्ष बताते हैं, “ये जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाती है जहां ट्रीलाइन खत्म हो जाती है यानी जहां के बाद पेड़ उगने बंद हो जाते हैं। मई से जुलाई में जब बर्फ पिघलती है तो इसके पनपने का चक्र शुरू जाता है।”

करामाती बूटी

kida jadi

इसकी तलाश करना आसान नहीं।एफआरआई की जिस टीम ने इसके लिए इन दुर्गम इलाकों की खाक छानी उसके सदस्य रिसर्च एसोसिएट कुमार खनेजा ने अपना अनुभव बताया, “धारचूला से करीब 10 दिन की पैदल ट्रैकिंग करने के बाद बड़ी मुश्किल से हम वहां पहुंचे लेकिन स्थानीय लोगों ने वहां पहले से ही डेरा डाल रखा था।” “इसे लाने के लिए उसे ही भेजा जाता है जिसकी निगाहें तेज हो क्योंकि ये नरम घास के बिल्कुल अंदर छुपा होता है और बड़ी कठिनाई से ही पहचाना जा सकता है।”